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करोड़ो रूपये की संपत्ति को छोड़ नीमच के राठौर दंपत्ति ने सांसरिक मोह त्याग लिया
  • neemuchnews.com | Sep 15, 2017
नीमच -

करोड़ों रुपए की संपत्ति है। हर माह लाखों की कमाई होती है। तीन साल की बेटी भी है और खुद उच्च शिक्षित है। इसके बावजूद पति-पत्नी ने इस सबको त्यागकर संत बनने का फैसला कर लिया है। परिवार की लाख कोशिशों के बाद भी मप्र के नीमच निवासी सुमित राठौड़ (34) और उनकी पत्नी चित्तौड़गढ़ के कपासन कस्बा निवासी अनामिका (34) अपना निर्णय बदलने को तैयार नहीं हैं। दोनों ही 23 सितंबर को गुजरात के सूरत में जैन भगवती दीक्षा लेंगे। साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल महाराज के सान्निध्य में यह दीक्षा जैन समाज में बिरला उदाहरण बनने जा रही है।

अनामिका भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कपासन निवासी अशोक चंडालिया की बेटी हैं। वे चित्तौड़गढ़ के ही सेंती निवासी सेठ परिवार की दोहित्री हैं। इनकी शादी सुमित से चार साल पहले हुई। भरे-पूरे संपन्न संयुक्त परिवार के साथ इनके 2 साल 10 महीने की बेटी इभ्या है। सुमित का नीमच में बड़े बिजनेस घराना है। उनके परिवार की 100 करोड़ से भी अधिक की प्राॅपर्टी है। 

आत्मकल्याणका बोध आने के बाद यह फैसला 
 सुमित और अनामिका का कहना है कि उन्हें आत्मकल्याण का बोध गया। इसलिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि बेटी आठ महीने की हुई तभी से शीलव्रत यानी ब्रह्मचर्य का पालन किया। बच्ची का हवाला देने पर वे बोले-यह बच्ची ही तो पुण्यशाली है। तभी तो इसके गर्भ में आते ही हमारे भीतर आत्म कल्याण का बोध गया। 

नीमच के अनामिका-सुमित राठौड़ जो सूरत में जैन दीक्षा लेंगे -
अनामिकाको आठवीं बोर्ड में जिले की पहली गोल्ड मेडलिस्ट होने का गौरव है। सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए राजस्थान बोर्ड की 10वीं क्लास में 18वीं और विज्ञान से 12वीं बोर्ड में 28वीं रैंक प्राप्त की। मोदी इंजीनियरिंग कॉलेज लक्ष्मणगढ़ (सीकर) से बीई किया। हिंदुस्तान जिंक में भर्ती निकली। मेरिट में 23 हजार अभ्यर्थियों में 17वें नंबर पर रही। आठ-दस लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की, लेकिन 2012 में सगाई के बाद जॉब छोड़ दिया। 

चित्तौड़गढ़ की अनामिका एमपी निवासी पति सुमित सूरत में 23 को लेंगे दीक्षा  -
सुमित : लंदन से डिप्लोमा और फैक्ट्री मालिक 
सुमितराठौड़ लंदन से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में डिप्लोमाधारी हैं। दो साल लंदन में जॉब करने के बाद दादा नाहरसिंह राठौर के कहने पर नीमच गए। जहां करीब 10 करोड़ की फैक्ट्री में 100 लोग काम करते हैं। इंफोसिस में इंजीनियर उनके बड़े भाई भी नौकरी छोड़कर इस व्यवसाय से जुड़ गए। इनका एक्सपोर्ट कारोबार भी है। 

नीमच में 1.25 लाख वर्गफीट का परिसर 
सुमित-अनामिकाके राजसी वैभव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके दादा नाहरसिंह का नीमच कैंट में 1.25 लाख वर्गफीट में अंग्रेजों का बनाया हुआ बड़ा कॉमर्शियल कैंपस है। नीमच सिटी में रहने का बंगला अलग है। सीमेंट कट्टों की फैक्ट्री के साथ कृषि, फाइनेंस आदि बिजनेस से परिवार की आर्थिक, धार्मिक सामाजिक दृष्टि से बड़ी पहचान है।

 

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करोड़ो रूपये की संपत्ति को छोड़ नीमच के राठौर दंपत्ति ने सांसरिक मोह त्याग लिया

करोड़ों रुपए की संपत्ति है। हर माह लाखों की कमाई होती है। तीन साल की बेटी भी है और खुद उच्च शिक्षित है। इसके बावजूद पति-पत्नी ने इस सबको त्यागकर संत बनने का फैसला कर लिया है। परिवार की लाख कोशिशों के बाद भी मप्र के नीमच निवासी सुमित राठौड़ (34) और उनकी पत्नी चित्तौड़गढ़ के कपासन कस्बा निवासी अनामिका (34) अपना निर्णय बदलने को तैयार नहीं हैं। दोनों ही 23 सितंबर को गुजरात के सूरत में जैन भगवती दीक्षा लेंगे। साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल महाराज के सान्निध्य में यह दीक्षा जैन समाज में बिरला उदाहरण बनने जा रही है।

अनामिका भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कपासन निवासी अशोक चंडालिया की बेटी हैं। वे चित्तौड़गढ़ के ही सेंती निवासी सेठ परिवार की दोहित्री हैं। इनकी शादी सुमित से चार साल पहले हुई। भरे-पूरे संपन्न संयुक्त परिवार के साथ इनके 2 साल 10 महीने की बेटी इभ्या है। सुमित का नीमच में बड़े बिजनेस घराना है। उनके परिवार की 100 करोड़ से भी अधिक की प्राॅपर्टी है। 

आत्मकल्याणका बोध आने के बाद यह फैसला 
 सुमित और अनामिका का कहना है कि उन्हें आत्मकल्याण का बोध गया। इसलिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि बेटी आठ महीने की हुई तभी से शीलव्रत यानी ब्रह्मचर्य का पालन किया। बच्ची का हवाला देने पर वे बोले-यह बच्ची ही तो पुण्यशाली है। तभी तो इसके गर्भ में आते ही हमारे भीतर आत्म कल्याण का बोध गया। 

नीमच के अनामिका-सुमित राठौड़ जो सूरत में जैन दीक्षा लेंगे -
अनामिकाको आठवीं बोर्ड में जिले की पहली गोल्ड मेडलिस्ट होने का गौरव है। सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए राजस्थान बोर्ड की 10वीं क्लास में 18वीं और विज्ञान से 12वीं बोर्ड में 28वीं रैंक प्राप्त की। मोदी इंजीनियरिंग कॉलेज लक्ष्मणगढ़ (सीकर) से बीई किया। हिंदुस्तान जिंक में भर्ती निकली। मेरिट में 23 हजार अभ्यर्थियों में 17वें नंबर पर रही। आठ-दस लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की, लेकिन 2012 में सगाई के बाद जॉब छोड़ दिया। 

चित्तौड़गढ़ की अनामिका एमपी निवासी पति सुमित सूरत में 23 को लेंगे दीक्षा  -
सुमित : लंदन से डिप्लोमा और फैक्ट्री मालिक 
सुमितराठौड़ लंदन से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में डिप्लोमाधारी हैं। दो साल लंदन में जॉब करने के बाद दादा नाहरसिंह राठौर के कहने पर नीमच गए। जहां करीब 10 करोड़ की फैक्ट्री में 100 लोग काम करते हैं। इंफोसिस में इंजीनियर उनके बड़े भाई भी नौकरी छोड़कर इस व्यवसाय से जुड़ गए। इनका एक्सपोर्ट कारोबार भी है। 

नीमच में 1.25 लाख वर्गफीट का परिसर 
सुमित-अनामिकाके राजसी वैभव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके दादा नाहरसिंह का नीमच कैंट में 1.25 लाख वर्गफीट में अंग्रेजों का बनाया हुआ बड़ा कॉमर्शियल कैंपस है। नीमच सिटी में रहने का बंगला अलग है। सीमेंट कट्टों की फैक्ट्री के साथ कृषि, फाइनेंस आदि बिजनेस से परिवार की आर्थिक, धार्मिक सामाजिक दृष्टि से बड़ी पहचान है।

 




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