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सिंगोली में आज भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह

सिंगोली -

17 मई बुधवार को  यहां भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश और जिला स्तर की प्रावीण्य सूची में स्थान पाने वाली विभिन्न स्कूली प्रतिभाओं का जिला कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव के हाथों सम्मान किया जाएगा । इस मौके पर प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन देने अनुभवी कैरियर काउंसलर  उपस्थित रहेंगे।

इस आशय की जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ नीमच जिला इकाई के अध्यक्ष प्रदीप जैन ने बताया कि संघ के बैनर तले आयोजित होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह में कक्षा 10वीं एवं 12वीं में 80 प्रतिशत व इससे ज्यादा अंक पाने वाली स्थानीय प्रतिभाओं को भी सम्मान देकर प्रोत्साहित किया जायेगा।

श्री जैन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 1 बजे स्थानीय पद्मावती सामुदायिक भवन पर होगी, जिसमे सबसे पहले जिला कलेक्टर प्रादेशिक एवं जिला स्तरीय प्रतिभाओं का सम्मान करेंगे, तथा कॅरिअर काउंसलर प्रतिभाओं को मार्ग दर्शन देंगे। इस मौके पर जिला पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह के अलावा,एसडीएम गरिमा रावत, एसडीओपी नरेंद्र सोलंकी ,जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष मदनलाल राठौर, पूर्व विधायक दुलीचंद जैन, कृषि उपज मंडी अध्यक्ष जावद जानीबाई धाकड़, प्रतिनिधि शंभू लाल धाकड़, पूर्व जनपद अध्यक्ष सत्यनारायण पाटीदार , सिंगोली, रतनगढ़ ,डीकेन , सरवानिया , जावद ,नयागांव ,  और अठाना के नगर पंचायत अध्यक्ष एवं अन्य कई जनप्रतिनिधि ,अधिकारीगण तथा इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी  आदि प्रशासनिक , राजनैतिक एवं सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख शख्सियतें मौजूद रहकर जिले को गौरान्वित करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान करेंगी। 

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देश-दुनिया

केंद्र सरकार ने माल्या को वापस भारत लाने के लिए यूके हाईकमीशन से की बात

बैंकों से लोन लेकर विदेश में जा बैठे व्यापारी विजय माल्या को लाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने माल्या को वापस लाने के लिए यूके हाईकमीशन से बात की है।

विदेश मंत्रालय ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि सीबीआई ने विजय माल्या को भारत लाने के लिए यूके हाई कमीशन से बात की है। हमें लगता है कि वह हमें जल्द ही इसकी इजाजत दें देंगे।

 

 

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एजुकेशन

सरकारी स्कूल के भवन एवं परिसर के बिगड़ते हालात

जावद -

राजस्व विभाग की अनदेखी से शासकीय विद्यालय देखने में मवैशियो का तबैला नजर आता है जिसका कारण यहा रसूखदारो द्वारा अतिक्रमण किया जाना सामने आया है। 
जहां एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में अच्छी से अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने का दावा कर रही हैं वहा शिक्षा प्रदान करने के स्थान मवैशियो के मल मुत्र जैसी  गंदगी से भरे पड़े है ! हैरानी की बात ये है कि इसी बदबुदार एवं गंदगी से सरोबार मवैशियो की मौजुदगी मे यहा के बच्चै मध्याहन भोजन और शिक्षा ग्रहण तो करते हैं पर सरकार के किसी भी अधिकारी को ये आज तक नजर ही नहीं आया । जावद तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मडावदा क्षेत्र के ग्राम रानपुर के शासकीय प्राथमिक विद्यालय ई.जी.एस.शाला  के दिन-प्रतिदिन हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं  कहीं स्कूल परिसर मे बनी बिल्डिंग में दरारें पड़ गई हैं तो कहीं स्कूल परिसर अवैध अतिक्रमण ताओं का अड्डा बनता जा रहा है । 
जहां एक तरफ जिला कलेक्टर द्वारा सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में तुरंत कार्यवाही करें। मामले में स्कूल प्रधानाध्यापक श्रीमती गुणसागर जैन ने बताया कि इसके लिए हमने ग्राम पंचायत को कई बार लिखित में दे दिया। तथा जब भी विधानसभा की जानकारी आती है कि आपकी शाला में अतिक्रमण है तो हर साल हम लिख कर देते हैं कि शाला में अतिक्रमण है पर कोई कार्यवाही नहीं होती। वही स्कूल राजस्व क्षेत्र में आने के कारण राजस्व विभाग के पटवारियों ने कई बार मौका कर पंचनामा भी बनवाया पर उस और राजस्व विभाग के कोई कदम सख्ती से नहीं उठे जिससे दिन प्रतिदिन अतिक्रमणता स्कूल परिसर मे बाउंड्रीवाल के अभाव में कचरे के ढेर की रोडियां व पालतू जानवर बांध रहे हैं वही शाला मैं पढ़ने वाले नन्हे मुन्ने बालक-बालिकाओं को रोडियो व मवेशियों के बीच ही खेलना पड़ता है ऐसे में छोटे बच्चे बच्चियों की जान को हमेशा खतरा रहता है कभी भी मवेशियों की वजह से उन बच्चों को कोई भी नुकसान हो सकता है खैेर अब यह देखना है कि क्या राजस्व विभाग ऐसे अतिक्रमणताओं के खिलाफ तुरंत कार्यवाही कर शासकीय स्कूल परिसर को अतिक्रमण से मुक्त करवाएगा या नहीं।

यह है जिम्मेदारो का कहना -

◆ हमने कई बार ग्राम पंचायत को लिखकर भी दे दिया पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई इन लोगों को मौखिक बोलने से भी कोई नहीं मानते हैं और रही बात बिल्डिंग के क्षतिग्रस्त होने की तो उसके लिए भी शिक्षा विभाग को हमने लेटर लिखा है शाला प्रधानाध्यापिका रानपुर - श्रीमती गुणसागर जैन।
◆ शाला में अतिक्रमण के संबंध में हमारे पास मामला आया था पर वह राजस्व क्षेत्र का मामला है इसलिए हमने पटवारियों को अवगत कराया उन्होंने पंचनामा भी बनाया पर अभी तक कोई कार्यवाही नही की। इन लोगों को मौखिक समझाने से समझ में नहीं आ रही है क्योंकि यह सब एक दूसरे के प्रतिस्पर्धा में अतिक्रमण करने में लगे हुए हैं । - सरपंच ग्राम पंचायत मड़ावदा शिवलाल पाटीदार।
◆ सरकारी स्कूल परिसर में अतिक्रमण का मामला है तो मैं आज ही दिखाती हूं।- अनुविभागीय अधिकारी जावद - श्रीमती गरिमा रावत !

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जरुर पड़े

खुला माता का भण्डार निकले सवा लाख रुपयें

नीमच सिंगोली रोड़ से लगे  सेमलीचन्द्रावत गांव के समीप ग्राम पंचायत मोड़ी मे  स्थितआरोग्य स्थल खेड़ा मोड़ी माता को इस बार 1लाख 27 हजार 451रुपयों का चढ़ावा प्राप्त हुआ है ! मंदिर संस्थान कोषाध्यक्ष दिलखुश नागदा ने बताया की नायब तहसीलदार श्रीमती वर्षा भाटी एवं नायब नाजीर की मौजुदगी में संस्थान का दान पात्र खोला गया जिसमें करीब एक लाख सत्ताईस हजार चारसो इक्यावन  रुपयों का चढ़ावा माता रानी को भेंट के रूप में प्राप्त हुआ है ! इस अवसर पर प्यारेलाल नायक उप सरपंच सुवाखेड़ा गज्जू जौशी सुरेशचन्द्र प्रहलाद देवीलाल राठौर नेमीचंद जैन  सहीत अन्य धर्मालुजन उपस्थित थे!

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विशेष खबर

निजी स्कूलों की फीस कंट्रोल कराना सरकार का काम : हाईकोर्ट

जबलपुर।

प्रदेश में निजी स्कूल अब तब तक मनमानी फीस वसूल सकेंगे जब तक प्रदेश इसके खिलाफ नियम नहीं बनाती। हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ पिछले दो साल से विचाराधीन जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। इससे स्कूलों पर अंकुश लगाने को लेकर अभिभावकों की कानूनी लड़ाई को बड़ा झटका लगा। इसके तहत हाईकोर्ट में प्राइवेट स्कूल फीस कंट्रोल नियम/कानून बनाए जाने की मांग की जा रही थी।शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की युगलपीठ ने अपना फैसला सुनाया। इसमें साफ किया गया कि कार्यपालिका का मुख्य कार्य नियम-कानून बनाना है, जबकि न्यायपालिका का कार्य उन नियमों-कानूनों का समुचित पालन कराना है। इसलिए हाईकोर्ट सरकार को नियम-कानून बनाने बाध्य नहीं कर सकता। साथ ही इस संबंध में संविधान के आर्टिकल-226 के तहत स्पष्ट कानून का भी अभाव है इसलिए हाईकोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए जनहित याचिका खारिज करता है।

सिर्फ कमी दूर करने दे सकते हैं निर्देश

हाईकोर्ट ने साफ किया कि नियम-कानून में किसी तरह की कमी होने पर कोर्ट उसे दूर करने के निर्देश अवश्य जारी कर सकती है। नियम-कानून संवैधानिक रूप से वैध नहीं हों तो हाईकोर्ट वह नियम-कानून रद्द करने का भी आदेश जारी कर सकता है। लेकिन नियम-कानून बनाने के सरकार के अधिकार में हस्तक्षेप या बाध्य करने के निर्देश नहीं दे सकता।

जनहित याचिकाकर्ता को पेश करना था कानून

सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय से कहा था कि वे ऐसा कोई कानून पेश करे, जिसके तहत हाईकोर्ट सरकार को फीस कंट्रोल संबंधी नियम-कानून बनाने निर्देश जारी कर सके। जनहित याचिकाकर्ता ऐसा नहीं कर पाए। इसके स्थान पर महज यह तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट के पास स्वयं के अधिकार हैं, जिनका प्रयोग कर वह सरकार को व्यापक जनहित में दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।

सरकार अपने स्तर पर कर रही कार्य

इस मामले की सुनवाई के अंतिम दिन सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि राज्य सरकार इस मामले में अपने स्तर पर कार्य कर रही है। पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर एक गाइडलाइन भी बनाई गई थी, जिसका स्वयं जनहित याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति दर्ज कर विरोध किया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के कारण गाइडलाइन अप्रभावी हो गई। हाईकोर्ट ने राज्य की ओर से प्रस्तुत इस जानकारी को भी रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका खारिज कर दी।

तीन जनहित याचिकाएं व एक अवमानना याचिका दायर कर चुके

डॉ.पीजी नाजपांडे मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों की लूट-खसोट के खिलाफ अब तक तीन जनहित याचिकाएं 2010 में, 2011 और 2014 में दायर कर चुके हैं। पूर्व की दोनों जनहित याचिकाएं निर्देश के साथ निराकृत की गई थीं। उन निर्देशों का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी।

जब अवमानना नोटिस जारी हुए तो राज्य शासन की ओर से हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दी गई कि सरकार निजी स्कूलों की फीस कंट्रोल करने नियम बनाने जा रही है। लेकिन अब तक नियम ठोस रूप से सामने नहीं आए। दरअसल, इसी वजह से तीसरी जनहित याचिका 2014 में दायर की गई थी, जो शुक्रवार को खारिज कर दी गई। हालांकि इससे पूर्व इसी जनहित याचिका में नोटिस जारी होने के बाद सरकार ने बार-बार नियम बनाने की प्रक्रिया जारी होने का झूठ बोला और बार-बार समय लेकर मामले को लंबा खींचे रखा।

छह साल से सिर्फ हवाई नियम

अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि सरकार छह साल से हवा में ही नियम बना रही है। इससे साफ है कि पर्दे के पीछे सरकार ही निजी स्कूलों की मनमानी लूट को समर्थन दे रही है। इस बीच कई निजी स्कूलों ने 100 से 150 प्रतिशत तक बेतहाशा फीस वृद्धि कर शोषण अभिभावकों का शोषण किया है।

गुजरात मॉडल व यूपी की पहल से लेना चाहिए सबक

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ विधिवेत्ताओं ने शुक्रवार के फैसले की मीमांसा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने स्वयं हस्तक्षेप न करते हुए सरकार के पाले में गेंद डाल दी है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह गुजरात मॉडल को लागू करने की दिशा में गंभीर हो या फिर यूपी की योगी सरकार की तर्ज पर निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के जरिए मनमानी फीस वसूली पर अंकुश सुनिश्चित करे।

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